Monday, 25 February 2019

ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन क्या है?


ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन जोकि विशेषतः बीटी के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन (बीटी) यूनाइटेड किंगडम में स्थित है। ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन कंपनी की स्थापना वर्ष 1837 ई. में हुई थी। इसका मुख्यालय लंदन, यूनाइटेड किंगडम में है। ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन कम्पनी वैश्विक स्तर पर संचार सेवाएं प्रदान करती है। बीटी यूनाइटेड किंगडम में सबसे बड़ा संचार सेवा प्रदाता है।  इसका प्रमुख उद्देश्य है कि यूनाइटेड किंगडम तथा यूरोप में दूरसंचार के विकास पर आधारित महत्वपूर्ण कार्य करना, ग्राहकों के अनुभव को बढ़ाना तथा बाजार के समय पर उत्पाद की मांग तेज़ करना है। इस संस्था ने एक समय विकास कार्यों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए वैश्विक दूरसंचार नेटवर्क विकसित करने का प्रयास किया है। ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन अनुसंधान तथा विकास पर अपने कारोबार का 2 प्रतिशत हिस्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में खर्च किए है। इससे स्पष्ट है कि बीटी ने सर्वाधिक तवज्जों प्रौद्योगिकी क्षेत्र को दी है। वर्ष 1981 ई. में ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन निजीकृत संस्था बन गयी थी। वर्ष 1984 ई. में ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन एक सार्वजनिक संस्था बन गयी थी। इस संस्था में वर्तमान में 1,37,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन के स्टॉक एक्सचेंजेस वैश्विक स्तर पर लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो तथा टोक्यो में स्थित हैं।

वर्तमान में बीटी के निदेशक सिमोन जोनाथन लौथ है। वर्तमान समय में, बीटी एक बहुआयामी संगठन बन गया है जो नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अहम कार्ये कर रही है। बीटी वर्तमान में विश्व के 170 से अधिक राष्ट्रों में सक्रिय है तथा इसका लगभग एक तिहाई राजस्व, वैश्विक सेवा प्रभाग से प्राप्त होता है। वर्तमान समय में बीटी विश्व की सबसे बड़ी संचार कंपनियों में से एक है।

सन्दर्भ-
1. रेफरेंस फ़ॉर बिज़नेस पोर्टल : एक्सेस।
2. बीटी संस्था का अवलोकन : ब्लूमबर्ग।
3. दी मिशन स्टेटमेन्ट ऑफ बीटी : यूके एस्से।


Saturday, 16 February 2019

क्यों आवश्यक है बौद्धिक संपदा, आइये जानते है..

बौद्धिक संपदा को अंग्रेजी में Intellectual Property के नाम से जाना जाता है। Intellectual Property को ही हिंदी भाषा में बौद्धिक संपदा कहते है। बौद्धिक संपदा का शाब्दिक अर्थ है कि बौद्धिक अर्थात् 'बुद्धि के योग्य' और सम्पदा अर्थात् 'सम्पत्ति' यानि मानव मस्तिष्क से किया गया कार्य या जिस अन्तर्वस्तु पर व्यक्ति या संस्था द्वारा कब्जा किया हो, उसे बौद्धिक संपदा कहते है। बौद्धिक संपदा से अभिप्राय है कि नैतिक और वाणिज्यिक रूप से मूल्यवान बौद्धिक सृजन। 
  • जेरेमी फिलिप्‍स के अनुसार - "बौद्धिक सम्‍पदा से अभिप्राय ऐसी वस्‍तुओं से है जो व्‍यक्‍ति द्वारा बुद्धि के प्रयोग से उत्‍पन्‍न होती है। (इन्‍ट्रोडक्‍शन टू इन्‍टेलेक्‍च्‍ुअल प्रापर्टी लॉ पुस्तक संस्‍करण 1986)।
'बौद्धिक संपदा' का तात्पर्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था की अन्तर्वस्तु, मानव-मस्तिष्क के उत्पाद से है। ये उत्पाद किसी व्यक्ति अथवा संस्था द्वारा कृति, संगीत, कला, खोज अथवा प्ररचना आदि किसी भी प्रकार का हो सकता है जो उस व्यक्ति अथवा संस्था की बौद्धिक संपदा या बौद्धिक सम्पत्ति है। बौद्धिक संपदा मानव-मस्तिष्क की रचनाओं का एक सन्दर्भ है। बौद्धिक संपदा के तहत किसी रचना का आविष्कार, साहित्यिक कार्य, कलात्मक कार्य , प्ररचना, वाणिज्य में इस्तेमाल प्रतीक आदि आते है। दरअसल, बौद्धिक सम्‍पदा बौद्धिक श्रम से उत्‍पन्‍न होने वाला उत्‍पाद है। बौद्धिक संपदा के प्रमुख विषय लेखकों की रचनाएं, निर्माणकर्ताओं के निर्माण और अविष्कारकर्ताओं के आविष्कार माने जाते है।

बौद्धिक संपदा की दो प्रमुख श्रेणियां इस प्रकार है -    

   1. प्रकाशनाधिकार एवं प्रतिवेशी अधिकार -  इसके तहत साहित्यिक, कलात्मक, संगीतात्मक, छायाचित्रात्मक एवं दृश्य-श्रवणात्मक कार्य शामिल हैं।
    2.  औद्योगिक संपदा - मानवीय उद्यम के सभी क्षेत्रों में किये गये आविष्कार, वैज्ञानिक खोजें, औद्योगिक डिजाइन, ट्रेडमार्क, सर्विस मार्क तथा वाणिज्यिक नाम व पदनाम शामिल हैं।

बौद्धिक संपदा के प्रमुख अधिकार


अधिकार का अर्थ होता है, हक या प्रभुत्व। बौद्धिक सर्जनात्मक परिप्रेक्ष्य में व्यक्तियों को दिए गए प्रभुत्व या अधिकार को, बौद्धिक संपदा अधिकार कहते है। बौद्धिक संपदा अधिकार देने का मुख्य उद्देश्य है मानवीय बौद्धिक सर्जनशीलता को प्रोत्साहित करना है बौद्धिक संपदा अधिकार प्रदान किये जाने का महत्व केवल इतना नहीं है कि बौद्धिक रचनाओं पर सदैव  मात्र लेखक का ही अधिकार होगा। बल्कि, "बौद्धिक संपदा अधिकार एक निश्चित समयावधि तथा निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र के मद्देनजर प्रदान किये जाते है।

बौद्धिक संपदा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक होने के कारण अधिकारों एवं नियमों की व्यवस्था की गई है।

भारत सरकार द्वारा 12 मई, 2016 को ‘राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति’ को स्वीकृति प्रदान की गई।2 इसका उद्देश्य है कि भारतीयों को रचनात्मकता में विशेष प्रोत्साहन देना। साथ ही उज्ज्वल भविष्य के लिए इस नीति का प्रयोग सम्भव होगा। इस नीति की मुख्य बातें है- भरतीय विकास के लिए ज्ञान होना आवश्यक है, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुविधा को बढ़ावा देना। बौद्धिक अधिकार नीति 'रचनात्मक भारत, अभिनव भारत' के लिए कार्य करती है।

बौद्धिक संपदा के तहत भारत मे सर्वप्रथम वर्ष 1911 में  'भारतीय संशोधन और डिज़ाइन अधिनियम' बना, वर्ष 1970 में 'एक्सव अधिनियम' को पारित किया गया। 'संशोधन अधिनियम' के नाम से वर्ष 1999, 2002, 2005 को कानून पारित किए गए। बौद्धिक सृजनात्मक के आधार पर बौद्धिक संपदा अधिकारों को निम्न वर्गों में बांटा गया है:- संशोधन, व्यापार चिन्ह, कॉपीराइट, भौगोलिक उपदर्शन।


सन्दर्भ-ग्रंथ:-

1. बौद्धिक सम्‍पदा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, बौद्धिक संपदा ब्लॉग, अमर मीना।
2. भारत के बौद्धिक संपदा अधिकार: चुनौतियाँ एवं समाधान, दृष्टि।
3. भारत के बौद्धिक संपदा अधिकार: चुनौतियाँ एवं समाधान, दृष्टि IAS.
4. बौद्धिक संपदा अधिकार नीति : ‘रचनात्मक भारत; अभिनव भारत’।
5.  उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय, भारत सरकार।
6. बौद्धिक संपदा अधिकार नीति : ‘रचनात्मक भारत; अभिनव भारत’, दृष्टि।
7. व्हाट इस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी।

Monday, 11 February 2019

बिटकॉइन पर हो सरकारी निगरानी

बिटकॉइन में निवेश करना काफी खतरनाक साबित हो रहा है क्योंकि यह संगणक नेटवर्किंग पर आधारित होता है ऐसे में हैकर सिस्टम हैक करके आपके बिटकॉइन आसानी से चुरा सकता हैं। साथ ही इसकी शिकायत सुनने के लिए कोई भी अधिकारी या कर्मचारी का प्रावधान नहीं होता है या इसे किसी सरकारी बैंकों द्वारा नहीं चलाया जाता है। बिटकॉइन में कीमत का अत्यधिक उतार-चढ़ाव होता है और न ही इसका विश्व में कोई नियम तैयार किया गया है। इसमें फर्जीवाड़ा भी ज्यादा है एक बार पासवर्ड भूलने पर पुनः पासवार्ड नहीं मिलेगा। बिटकॉइन के बढ़ते मूल्यों को देखते हुए लोग बिटकॉइन में निवेश तो कर लेते हैं, परन्तु यह लचीलापन आम लोगों को महँगा पड़ जाता है। बिटकॉइन से रातोंरात अमीर बनने वाला व्यक्ति, किसी भी पूंजीपति या आम व्यक्ति की जिंदगी भर की कमाई को आकस्मिक बर्बाद कर सकता है।


बिटकॉइन, सरकार को एक नियामक प्रशासन-व्यवस्था के तहत लेना चाहिए ताकि ये भरोसेमंद बन सकें। इसका उपयोग बिना भय के किया जा सकें। जैसे कि कई राष्ट्रों ने बिटकॉइन को मान्यता तक नही दी हैं इसी प्रकार भारत सरकार को भी इस पर विचार करना चाहिए। बिटकॉइन नियामक न होने के कारण खतरा साबित करता है क्योंकि इसे वैश्विक स्तर पर निजी लोग संचालित करते हैं इसलिए सरकार का नियंत्रण होना आवश्यक हैं ताकि आम लोगों के लिए उपयोगी हो सके।

Sunday, 10 February 2019

स्वच्छता की स्वयं से हो शुरुआत

प्रत्येक वर्ष के गणतंत्र व स्वंतन्त्रता दिवस के अवसर पर देश की अज़ादी के वर्ष गिनते है। हमें पता है कि आज यह जो भारत हम सभी के समक्ष है यह "गांधी का भारत" नहीं है, क्योंकि ये "गांधी के सपनों का भारत" हैं। महात्मा गांधी का ही सपना था "स्वच्छ भारत" हो। जिसे आधुनिक भारत के रूप में परिभाषित करते है। महात्मा गांधी, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता से पहले ही स्वच्छता की बात उठायी थी। साथ ही स्वच्छता को प्राथमिकता दी थी।


भारत वैदिक परम्पराओं और अध्यात्म की दुनिया में विश्वगुरू रहा है, जिस प्रकार स्वच्छ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है, ठीक उसी प्रकार स्वच्छ देश में स्वस्थ नागरिक निवास करता है। स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छ्ता ही सेवा आदि गतिविधियों को संचालित करने से सफाई होगी? क्या प्रशासन या किसी समाजसेवी संस्था द्वारा प्रेरित करने पर ही सफाई होगी? क्या आप अपने राष्ट्र को अपना घर जैसा नहीं समझते? क्यों? जहां इच्छा की वही गन्दी कर दी? क्या जब तक परिवार का मुखिया सफाई के लिए नहीं बोलेगा, सफाई नहीं होगी? वहाँ सफाई होगी, क्योंकि वो अपना परिवार है। क्यों नहीं हम राष्ट्र को अपना परिवार मान कर स्वच्छता की शपथ लेते। मात्र हमें मनोवृत्ति में परिवर्तन करने की आवश्यकता है।
स्वच्छता का दायित्व देशवासियों में स्वयं होना चाहिए। परन्तु यह हमारा दुर्भाग्य है कि आज़ादी से पहले व आज़ादी के बाद भी नागरिकों को राष्ट्र के महापुरुषों व प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छ्ता के लिए प्रेरित किया जाता रहा हैं। हम जानते है कि स्वच्छता और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक है, क्योंकि बिना स्वच्छता के आधुनिकता की कल्पना करना जटिल है। इसी कारण सभी भारतीयों को स्वच्छता का मूलमंत्र समझना होगा तभी भारत राष्ट्र "स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत" होगा।

कदम से कदम मिलाना है,
भारत को स्वच्छ बनाना है।

लेख सहयोगी एवं आभार - श्री हितेश मिश्रा

Sunday, 3 February 2019

प्यार में ज्यादा

फुरसत में हो तो प्यार ज्यादा,
व्यस्त हो तो दुश्मन ज्यादा।
मिलते हो तो प्यार है ज्यादा
मिलने को टालते हो तो,
स्वार्थी और अहंकारी हो ज्यादा।

'हां' में 'हां' करते हो तो,
प्यार है ज्यादा।
'हां' में 'न' की तो,
तुमने प्यार नहीं किया ज्यादा।
'हां' में 'न' करते हो तो
पराया भी हो ज्यादा।

मिलने को बरकरार हो ज्यादा,
तो उसका प्यार है ज्यादा।
मिलने को 'मना' किया
तो दुश्मन हो तुम ज्यादा

विवाह करना हो तो,
भविष्य देखना होता हैं ज्यादा।
वर्तमान में बात भविष्य पर हुई,
तो स्वार्थी हो तुम ज्यादा।
फुरसर में हो तो प्यार है ज्यादा,
व्यस्त हो तो दुश्मन हो ज्यादा।

प्रस्तुत कविता अमर उजाला के मेरे अल्फाज़(काव्य संग्रह) में 07/02/2019 को प्रकाशित है..  आप इस लिंक पर भी पढ़ सकते है..💐🙏
(https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/kashish-verma-pyaar-mein-jyada-1549218593118)

हाजीपुर ट्रैन हादसे के बाद तमाम प्रश्न?

बिहार के जोगबनी से आनंद विहार(दिल्ली) स्टेशन तक चलने वाली सीमांचल एक्सप्रेस के पटरी में दरार होने के कारण, आधी रात को हाजीपुर में लगभग 10 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में मृतकों की संख्या 7 बताई जा रही है। वही लगभग 25 लोग गंभीर रूप से घायल है। ये दोनों आँकड़ें बढ़ सकते है। प्रत्येक ट्रैन हादसा होने के बाद रेलवे द्वारा आगे रेल हादसे न होने के आश्वासन दिए जाते है। इस हादसे के पीछे साजिश बताई जा रही है। आखिर ये साजिश है तो ये साजिश रची कैसे गयी? इसका जिम्मेदार कौन? यदि ये रेलवे की लापरवाही है तो कितनी बड़ी लापरवाही कैसे? आखिर कबतक होते रहेंगे ट्रैन हादसें? क्या मृतकों के परिजनों को मुआवजा देकर, क्या उनकी घर की खुशहाली वापसी आ सकती है? ऐसी बड़ी लापरवाही हर ट्रैन हादसों में होती है मगर इस हादसों को राजनीति का मुद्दा बनाकर छोड़ दिया जाता है। ऐसे मुद्दे मात्र राजीनीति में ही बने रहते है। 2-4 दिन बाद इस खबर की कोई जानकारी नहीं मिल पाती।

सदैव ट्रैन हादसों के बाद जांच की जाती है। बिना हादसे के क्यों नहीं जांच होती? क्या रेलवे जांच प्रक्रिया शुरू करने के लिए ट्रेन हादसे का इंतजार करता है? रेलवे विभाग से अनुरोध है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख़्त कदम उठाए जाने चाहिए ताकि तमाम लोगों की जान बच सके और बड़े व छोटे हर तरह के ट्रैन हादसों पर रोक लगाई जा सकें।

Friday, 25 January 2019

गणतंत्र दिवस

अंग्रेजों के अत्याचार झेलने के बाद भी हमारे आजादी के शेर आजादी के लिए लड़ते और संघर्ष करते रहे। ब्रिटिश सरकार की पाबंदियों से परेशान स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरु जी ने सन 1930 को इसी दिन 26 जनवरी को रावी नदी के निकट तिरंगा लहराया साथ ही यह घोषणा कर दी कि-"आज से हम स्वतंत्र हैं। हम आज़ाद है कि हम किसी ब्रिटिश कानून को स्वीकार करे या नहीं। जब तक हम पूर्ण स्वतंत्र नहीं हो जायेंगे, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे!”
लंबे समय से ब्रिटिश शासन के गुलाम रहे भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी तो मिली, परंतु पुरु तरह से नहीं क्योंकि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों या नियमों का पालन करने के लिए प्रत्येक भारतीय मजबूर था। स्वतंत्रता के लगभग ढ़ाई वर्षों बाद यानी 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान प्रभावी हुआ। भारतीय संविधान को लागू पंडित नेहरू के, ब्रिटिश सरकार के कानूनों की नाराजगी के प्रति दिए गए भाषण 26 जनवरी 1930 को ध्यान में रखकर 26 जनवरी 1950 को लागू या प्रभावी किया गया था।

बात यह नहीं कि भारतीय संविधान कब लागू हुआ? बात यह है कि भारतीय संविधान होने के बावजूद भी नया संविधान रचा जा रहा है जिसका मुख्य कारण है भारतीय संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन करना या संविधान का उलटफेर करना। जैसे कि दोषी को निर्दोषी या निर्दोषी को दोषी घोषित करना, कितना उचित है??

ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन क्या है?

ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन जोकि विशेषतः बीटी के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश टेलिकम्युनिकेशन (बीटी) यूनाइटेड किंगडम में स्थित है। ब्रिटिश टे...