Friday, 11 January 2019

राष्ट्रीय युवा दिवस व विवेकानंद जयन्ती


स्वामी विवेकानंद एक संत, देशभक्त, आध्यात्मिक तथा महान भारतीय नेता थे। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी,1863 में कोलकाता में हुआ था। योग, राजगुरु तथा ज्ञानयोग जैसे ग्रंथों की रचना कर युवा जगत को नई दिशा दिखाई। इससे अनंत युगों तक जनमानस प्रभावित रहेगा, साथ ही हमें इन ग्रंथों से प्रेरणा भी मिलती रहेगी। स्वामी विवेकानंद बाल्यकाल से ही आध्यात्मिक व्यक्ति थे। वह हिंदू भारतीय शास्त्रों, संगीत, खेल तथा शारीरिक व्यायाम आदि क्रियाओं में भी रुचि रखते थे।
सवेरा होते ही अपने लक्ष्य के लिए कार्य करना आरंभ कर दो, जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए, तब तक हार ना मानो। स्वामी जी के इस मशहूर कथन से व्यक्त है- "उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये"।

स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयंती व राष्ट्रीय युवा दिवस की अशेष शुभकामनाएं।💐💐

Wednesday, 5 December 2018

फोकस ग्रुप डिस्कशन(केंद्रीय समूह परिचर्चा या एफजीडी)

किसी शोध समस्या के समाधान के लिए एक समूह पर केंद्रित होकर की गयी चर्चा, केंद्रीय समूह परिचर्चा या फोकस ग्रुप डिस्कशन कहलाता है। फोकस ग्रुप डिस्कसन मीडिया, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के तहत प्रयोग किया जाता है। फोकस ग्रुप डिस्कशन भागीदारी शोध का एक हिस्सा है। फोकस ग्रुप डिस्कशन समस्या से सम्बंधित आंकड़े या तथ्य संकलित करने की एक तकनीक है जो गुणात्मक शोध एवं गणनात्मक शोध के अंतर्गत आती है। लेकिन गुणात्मक अध्ययन हेतु अधिक प्रयोग किया जाता है अतः इसे गुणात्मक शोध विधि भी कहते है। गुणात्मक शोध विधियों में फोकस ग्रुप डिस्कशन(एफजीडी) विधि सबसे लोकप्रिय विधि है। एफजीडी बाजार शोध (मार्केट रिसर्च) में सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली एक विधि है। एफजीडी में किसी उत्पाद, योजना, सेवा आदि को बाज़ार में लाने से पूर्व व पश्चात में किया जाने वाला अध्ययन है। बाजार में लाने से पूर्व के संदर्भ में उदाहरणतः- मान लिया जाए कि मुझे "एक साप्ताहिक अख़बार निकलना है"। अब उस अख़बार का क्षेत्र दिल्ली है। मुझे ये मालूम करना है कि दिल्ली की जनता अखबार में क्या देखना पसंद करती हैं?, ज्यादा कौन सा पेज पढ़ा जाएगा?, कितने पेज का अख़बार उचित होगा? आदि प्रश्नों के उत्तरों में विश्वसनीयता, गहनता आदि बनी रहे इसके लिए केन्दित समूह चर्चा अत्यंत सहायक होगी। इन प्रश्नों के उत्तर के आधार पर अख़बार की रूपरेखा में तब्दीलियां करनी पड़ेगी। 

बाजार में लाने के पश्चात के संदर्भ में उदाहरण- मान लीजिए आपने दिल्ली में 1 साल पहले एक अखबार निकाला था, उस का प्रचार अधिक हो, उस अखबार से दिल्ली के लोग परिचित हुए? उसमें क्या बदलाव किया जाए जो वो अधिक पाठक तक पहुंचे व उनकी पसन्दीदा अखबार बने? आदि प्रश्नों के उत्तर के लिए भी एफजीडी सहायक होती है। एफजीडी में उद्देश्यानुसार सामान्य तौर पर 6 से 8 उत्तरदाताओं के समूह पर चर्चा की जाती है। इस चर्चा की सामान्य समयावधि 25 मिनट से 45 मिनट तक मानी जाती है।इसकी अधिकतम अवधि एक घंटे और कभी कभी डेढ़  घंटे तक होती है।इन सीमाओं में सीमित फोकस ग्रुप डिस्कशन उचित होता है। एफजीडी से व्यक्तियों की मानसिकता, चेतना की धारा, समाज की मांगों का प्रतिनिधित्व ज्ञात किया जाता है। किसी समस्या का गहनता से विश्लेषण करने के लिए एफजीडी का उपयोग किया जाता है। साथ ही एफजीडी की सहायता से शोध में गहनता स्तर का भी विस्तार होता है। 

फोकस ग्रुप डिस्कशन करने से पहले मॉडरेटर को अपने पास एक अच्छा ऑडियो अथवा वीडियो रिकॉर्डर रख लेना चाहिए ताकि पूरी चर्चा व तथ्यों को सावधानीपूर्वक रिकॉर्ड किया जा सके। आवश्यकता पढ़ने पर उसे पुनः सुना जा सके। इसके अलावा मॉडरेटर को नोटबुक पर मुख्य बातों को तुरंत नोट कर लेना चाहिए। एफजीडी में एक मॉडरेटर होता जो किसी एक ग्रुप को मोडरेट करता है। मॉडरेटर फोकस ग्रुप में प्रतिभागी के रूप में रहता है। शोधार्थी किसी भरोसेमंद व्यक्ति(निष्पक्ष) को मॉडरेटर के रूप में नियुक्त कर तथ्य जुटाता है। शोधार्थी स्वयं भी मॉडरेटर हो सकता है। मॉडरेटर द्वारा संकलित तथ्यों का संख्यात्मक अध्ययन असम्भव होता है तथा इनके तथ्यों के परिणामों की त्रुटियों का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। 
  •   मॉडरेटर के ध्यान रखने योग्य बातें-

1. मॉडरेटर पक्षपाती नहीं होना चाहिए।
2. मॉडरेटर को कुशल होना चाहिए।
3. मॉडरेटर प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने वाला होना चाहिए।

एफजीडी करने से पूर्व शोधार्थी या मॉडरेटर को समूह चर्चा जिस समस्या से सम्बन्धित हो, उससे सम्बन्धित प्रश्नों को सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध कर लेना चाहिए। 

  • प्रश्नों की योजना बनाते समय या पूछते समय तमाम बातों का विशेष ध्यान रखें-

1. खराब शब्दों का प्रयोग न किया जाए।
2. पक्षपाती प्रश्न न बनाये जाए।
3. ज्यादा सुलझे प्रश्न न पूछे जाए। सरल सहज प्रश्न होने चाहिए।
4. साहित्यिक भाषा व लम्बे वाक्यों से बचाव हो।
5. उचित व कम प्रश्न ही पूछे।
6. ऐसे प्रश्न बनाए की 8 से 12 प्रश्नों में ही आपकी समस्या का समाधान हो सकें।
7. ऐसे प्रश्न न पूछे जिससे सरल 'हाँ' अथवा 'नहीं' उत्तर आये, ऐसा प्रश्न होना चाहिए जिसका उत्तर विस्तार से मिलना चाहिए। 

ये सभी लापरवाहियां आपके एफजीडी को अनुचित कर सकती है। साथ ही शोध समस्या की गुणवत्ता को खराब कर सकती हैं। इसी कारण इन बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

  • सन्दर्भ-
1. विद्यार्थी ब्लॉग।
2.  Focus Group Discussion : Spinter Online.
3. How to conduct a successful FGD :  Socialcops.

Tuesday, 27 November 2018

ओछी राजनीति से बचें राजनेता

भारत में पांच राज्यों में चुनावी प्रक्रिया चल रही है। साथ ही 7 दिसम्बर 2018 के बाद जनता अपनी भावी सत्ता की किस्मत ईवीएम में बंद कर देंगी। इस चुनाव में फिर से अभद्र राजनीति दिन-ब-दिन देश में भद्दा माहौल बना रही हैं। चुनावी माहौल में कोई किसी के पिता का नाम पूछ रहा है? तो कोई किसी का गोत्र पूछ रहा है? ऐसे में राजनेताओं द्वारा मात्र जनता को जातिगत विभाजित करने में किसी प्रकार की कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही। जाति, नामदार, गोत्र, धर्म आदि शब्द पिछले कुछ दिनों से नई परिभाषा गढ़ रहे है। आखिर, ये सब करने की क्या आवश्यकता हैं? ऐसे में आम लोगों में प्रश्न उठता हैं कि क्या चुनाव का अस्तित्व यही रह गया है। क्या सभी नेता-गण जनता की आवश्यकताओं को भूल जाते हैं? सभी राजनेताओं द्वारा जनता को मूर्ख बनाने व अपनी व्यक्तिगत राजनीति बन्द करनी चाहिए। साथ ही जनता की आवश्यकताओं और देश के विकास की बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि भारतीय राजनीति का अस्तित्व बना रहे। यदि अभद्र राजनीति जारी रही तो देश का कोई अस्तित्व नहीं रह जायेंगा। (हिंदुस्तान टाइम्स व राजस्थान पत्रिका में 28/11/2018 को प्रकाशित मेरा लेख)

Monday, 5 November 2018

दीपावली


फिर से दीपावली आई रे, लक्ष्मी आई रे
खुशियों का अंबार लेकर,
सबको प्यार देने लक्ष्मी आई रे
पैसों का अंबार लेकर,
सबको सुख शांति देने लक्ष्मी आई रे
फिर से दीपावली आई रे, लक्ष्मी आई रे।

एक साल में एक दिन इसे मनाया जाए
क्योंकि इस दिन लक्ष्मी का आगमन हो जाए
पूरे साल इसका इंतजार किया जाए
फिर उस दिन के बाद लक्ष्मी चली जाए
फिर से एक साल लक्ष्मी का इंतजार किया जाए
फिर से दीपावली आई रे, लक्ष्मी आई रे

बाजार में रौनकें लेकर दीवावली आई रे
इससे पहले घरों-कार्यालयों में मरम्मत हो
सबकी आस्था हो, ताकि लक्ष्मी का आगमन हो,
घर-घर पैसा लेकर लक्ष्मी आई रे।
फिर से दीपावली आई रे, लक्ष्मी आई रे।

सबको कॉल घुमाव, सन्देश छोड़ो
बधाइयां बांटों, मिठाइयां बांटों
घर-घर दीया जलाओ
मन से मन में दीया जलाओ
लक्ष्मी का आगमन धूमधाम से कराओ
क्योंकि
फिर से दीपावली आई रे, लक्ष्मी आई रे।

उस दिन प्रकाश का होगा अद्भुत मुहूर्त
मन से मन में ख़ुशियों बंटने से,
बदलेगी विश्व मे भारत की सूरत
सबके आशीर्वाद से ।
होगा नई पहल का मुहूर्त
क्योंकि,
फिर से दीपावली आई रे, लक्ष्मी आई रे।

Wednesday, 31 October 2018

पिता का सम्मान

उसने मुझे कंधे पे खिलाया
हर दुख छिपा कर
मुझे भरपूर सुख दिलाया।
अपना पेट न भर कर,
मुझे हरपल खूब खिलाया।
उसने मुझे कंधे पर खिलाया..

पिता का कंधा..
वो स्वर्ग है,
जिसमें जिंदगी का हर दुख
सुख में बदल जाता हैं।
पिता का बाहर रहना
मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी,
कमजोरी है।
उसका चेहरा देखे बिना
दिन का अस्तित्व नहीं रहता।
हरपल मुझे उसका कन्धा ही याद आता,
क्योंकि
उसने मुझे कंधे पर खिलाया..

जिंदगी की व्यस्त दौड़ में भी
अगर मांगना हो तो,
पिता सदैव रहें साथ।
उसके साथ जो वक्त बिताया
उसने मुझे चैन सिखाया
साथ ही
उसने मुझे कंधे पर खिलाया।

(अमर उजाला के "मेरे अल्फ़ाज़" काव्य ग्रंथ में प्रकाशित कविता का लिंक https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/kashish-verma-pita-ka-samman)

Tuesday, 30 October 2018

दिल्ली की लत

बाहर निकल आया
दिल्ली से,
पगडंडियों के रास्ते
दिल अभी भी बैठा है
तेरे वास्ते,
यह खेल है दिल्ली का
किसी को समझ नहीं आता।
लगता है
तू है मेरे वास्ते
मैं हूँ तेरे वास्ते..
ये फासले..
कुछ दिन वास्ते..

यहां का मौसम सुहाना
दिल्ली से बेहतर
है हवा यहां की..
फर्क है मन नहीं लगता
इन प्रदूषणमुक्त हवाओं में..
दिल्ली की हवा
प्रदूषित है
है अपने वास्ते।


https://www.amarujala.com/kavya/mere-alfaz/kashish-verma-delhi
(अमर उजाला काव्य टीम द्वारा "मेरे अल्फ़ाज" ग्रंथ में भी प्रकाशित)

Tuesday, 25 September 2018

स्वास्थ्य जगत में एक सकारात्मक पहल, कितनी होगी कारगर?


23 सितंबर को झारखंड के रांची से विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा देने वाली 'आयुष्मान भारत योजना' की शुरुआत की गई। आयुष्मान योजना का उद्देश्य है कि उन गरीब लोगों का उपचार करना जो लोग गरीबी के कारण स्वास्थ्य उपचार नहीं करवा सकते थे। ऐसे में यह योजना स्वास्थ्य जगत में काफी फायदेमंद साबित होगी क्योंकि आयुष्मान योजना के तहत गरीब-वर्ग के लोगों का ध्यान रखा गया है। इस योजना से 50 करोड़ से ज्यादा भारतीयों को 5-5 लाख का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। साथ ही 50 करोड़ से ज्यादा लोग इस योजना से लाभान्वित होंगे जोकि यह एक सकारात्मक पहल है। इस योजना की विशेष बात यह है कि इसका सारा लेनदेन डिजीटल है। इस कारण सभी राशन कार्ड परिजन, मरीज का उपचार बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए अन्य राज्यों में भी आसानी से करवा सकते है।


दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना इसलिए है कि अभी तक किसी भी देश ने सरकारी फंड से इतनी बड़ी पहल स्वास्थ्य जगत में कभी नहीं की है। ऐसे में यदि अमेरिका और कनाड़ा जैसे बड़े देशों की आबादी जोड़ ली जाए तो भी आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की संख्या अत्यधिक होगी। सबसे बड़ी बात अब ये भी है कि अब किसी भी गरीब-वर्ग के लोगों को किसी व्यापारी या साहूकारों के आगे हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है। साथ गरीब-वर्ग के लोग भी अब साहू-वर्ग के लोगों की तरह निजी अस्पतालों में उपचार करने के हकदार होंगी। ऐसे में भारतीय सन्दर्भ में आयुष्मान भारत योजना एक सराहनीय पहल है। इस योजना का प्रचार हर पहलू और हर मोड़ से होना चाहिए ताकि प्रत्येक नागरिक इस मुहिम का लाभ उठा सकें। परन्तु प्रश्न यह है कि क्या यह योजना सुचारु रूप से चल सकेंगी? या इसमें भी एजेंट अपना वर्चस्व बना लेने में सफल होंगे? इस सभी कुरीतिओं से निपटने के लिए भी सरकार को कड़े इंतेज़ाम करने चाहिए ताकि ये मुहिम सुचारु रूप से चल सकें। मगर सरकार द्वारा इस मुहिम को लागू करना स्वास्थ्य जगत में एक सकारात्मक पहल है। भारत सरकार द्वारा भविष्य में ऐसी और मुहिमों को लागू करना होंगा ताकि जन-जागरूकता को बढ़ावा मिल सकें।

राष्ट्रीय युवा दिवस व विवेकानंद जयन्ती

स्वामी विवेकानंद एक संत, देशभक्त, आध्यात्मिक तथा महान भारतीय नेता थे। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी,1863 में कोलकाता में हुआ था। योग,...